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Sunday, July 16, 2017

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भोपाल मंत्री नरोत्तम नही मिली राहत राष्टयपति चुनाओ में भी वोट नही डाल पायगे न विधानसभा सत्र में भाग लेपायगे

 जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा को झटका दिल्ली हाईकोर्ट की डबल बेंच ने मिश्रा द्वारा सिंगल बेंच के आॅर्डर (जिसमें आयोग के 23 जून के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी गई थी) को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने मिश्रा को राष्ट्रपति चुनाव में वोटिंग करने और विधानसभा सत्र में भाग लेने के संबंध में राहत नहीं दी है।
कोर्ट ने कहा है कि ये अंतरिम आदेश है, जो याचिकाकर्ता द्वारा मांगे गए स्टे आॅर्डर के परिप्रेक्ष्य में दिया गया है, जिसका अंतिम सुनवाई पर असर नहीं होगा। आगे इस मामले की सुनवाई 28 अगस्त को तय कर दी गई। मिश्रा के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि राष्ट्रपति चुनाव में वोट डालने और विधानसभा सत्र में भाग  लेने की अनुमति दी जाए।   मिश्रा को  विधानसभा सत्र में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जाती है तो यह ठीक नहीं होगा। 2008 के पेड न्यूज के मामले मे मिश्रा को 2017 में चुनाव आयोग ने अयोग्य ठहराया है, जो ठीक नहीं है। 
 
राजेंद्र भारती के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता तनखा ने कहा
यह इलेक्शन प्रोसेस में रूल ऑफ ला का मामला है। चुनाव  प्रक्रिया में आयोग ने इसे बड़ी मुश्किल से लागू किया है।  अब इस पर रोक लगा दी जाए तो इस देश में चुनावों में जो गलत काम होते हैं उस पर  कैसे रोक लगाई जाएगी। इस केस में 69 बार सुनवाई हुई। राष्ट्रीय स्तर की कमेटी ने 42 पेड  न्यूज जांच में सही पाई।  
शेजवार को मिल सकती है संसदीय कार्यों की जिम्मेदारी 
नरोत्तम मिश्रा पर इस्तीफे का दबाव बढ़ गया है। मिश्रा का कहना है कि उन्हें राष्ट्रपति चुनाव में वोटिंग की अनुमति नहीं मिली है, उनकी याचिका तो स्वीकार कर ली गई है। इस बीच वन मंत्री गौरीशंकर शेजवार को संसदीय कार्यों की जिम्मेदारी देने का फैसला लगभग तय है। राजस्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता के नाम की चर्चा भी है।  
 
तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए   
संविधान विद सुभाष कश्यप का कहना है कि चुनाव आयोग के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट की सिंगल बैंच ने सही माना है। इसके बाद तो किसी भी सदस्य को, मंत्री रहने का अधिकारी नहीं है, उन्हें तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए 
जिस दिन दोषी पाया गया, ऑर्डर उसी दिन से : कोर्ट
हम इस स्टेज पर चुनाव आयोग के आॅर्डर को सामान्य नहीं ठहरा सकते, जो भी फैसले लिए गए है, वे सही हैं।
-तर्क कि 2008 की गलती के लिए 2017 में दोषी नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि कानून के लिए जब व्यक्ति दोषी पाया जाता है, उस तारीख से ऑर्डर लागू होता है।
-चुनाव आयोग का आॅर्डर एक नेशनल लेबल की पेड न्यूज कमेटी की रिपोर्ट पर है, जिसने प्रथम दृष्टता पाया कि जो न्यूज छपवाई गई वह पेड न्यूज को परिभाषित करती है।
-इलेक्शन पिटीशन में दोषी पाया जाना और इलेक्शन कमीशन को हिसाब-किताब न देना, दोनों अलग-अलग विषय हैं। चुनाव आयोग ने सेक्शन ने 10 (ए) सिविल केस के साक्ष्य के मापदंड के हिसाब से तय किया है

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