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Friday, July 14, 2017

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भोपाल नगर निगम ट्रांसपोर्ट घोटाला अधिकारी आरके परमार सहित वर्कशाप के 44 कर्मचारियों पर एक साथ कार्रवाई

नगर निगम के ट्रांसपोर्ट अधिकारी आरके परमार सहित वर्कशाप के 44 कर्मचारियों पर एक साथ कार्रवाई हुई है। परमार को हटाकर उपायुक्त राहुल सिंह राजपूत को प्रभार दिया गया
है। क्लर्क शशि नारायण मीणा और कंप्यूटर ऑपरेटर मो. सोहेल को बर्खास्त कर दिया गया है। हैड मैकेनिक शमीम अहमद खान को निलंबित किया गया है। 40 कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काट लिया गया है। यह पहला मौका है जब वर्कशाप में इतनी बड़ी कार्रवाई हुई है। आयुक्त छवि भारद्वाज शुक्रवार को अचानक वर्कशाप पहुंच गईं। 
वर्कशाप में ई- फाइलिंग सिस्टम का मजाक बना हुआ था। स्पेयर पार्ट्स की थोक खरीदी की बजाय रोजाना 25-25 हजार की कई फाइलें बना कर पार्ट्स खरीदे जा रहे थे। जिस दिन फाइल बनी उसी दिन कोटेशन आ गए, सप्लाई हो गई और पेमेंट भी हो गया। अस्थायी (25 दिवसीय) कर्मचारी मीना के पास टेंडर जैसा महत्वपूर्ण काम था। वर्कशाप के किसी भी मैकेनिक ने आईटीआई या किसी अन्य संस्था से वोकेशनल या स्किल ट्रेनिंग कोर्स नहीं किया है। 
निगमायुक्त ने जब्त कर लीं 100 से ज्यादा फाइलें
- ट्रांसपोर्ट ऑफिसर परमार को हटाया
- दो कर्मचारियों को नौकरी से निकाला, 40 लोगों का एक दिन का वेतन काटा।
- 100 से ज्यादा फाइलें जब्त।
- उपायुक्त राहुल सिंह राजपूत को सौंपा ट्रांसपोर्ट का प्रभार। 
घोटाले की धुरी : हेड मैकेनिक सस्पेंड
वर्कशॉप में करीब 20 साल से कार्यरत हेड मेकेनिक शमीम अहमद खान को यहां चल रहे घोटाले की धुरी बताया जाता है। शमीम की पसंद के सप्लायर ही यहां पार्ट्स सप्लाई करते रहे हैं। इनमें से कुछ के पास कोई दुकान भी नहीं है। इन सभी फर्म को ब्लैक लिस्ट किया जा रहा है। गड़बड़ी सामने आने के बाद शमीम को निलंबित कर दिया है।
परमार को हटाया, उपायुक्त राजपूत को प्रभार 
ट्रांसपोर्ट अधिकारी राजेंद्र परमार को हटा कर उनकी विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। अपर आयुक्त प्रदीप जैन को जांच अधिकारी बनाया गया है। उपायुक्त राहुल सिंह राजपूत को ट्रांसपोर्ट का प्रभार सौंपा गया है।
पुराना सामान नहीं मिला, कोई रिकाॅर्ड नहीं 
निगमायुक्त ने जब खरीदे सामान के हिसाब से वाहनों से निकाला पुराना सामान मांगा तो नहीं मिला। किस गाड़ी में क्या काम हुआ, इसका भी कोई रिकाॅर्ड नहीं था।
क्लर्क-कंप्यूटर ऑपरेटर को नौकरी से हटाया 
निगमायुक्त ने क्लर्क मीना व कंप्यूटर ऑपरेटर सोहेल को नौकरी से निकाल दिया। दोनों करीब सात साल से यहां कार्यरत थे। इंजीनियरिंग की डिग्री के बावजूद मीना यहां अस्थाई क्लर्क था।

हर अधिकारी के पास आठ कर्मचारियों का स्टाफ 
निगम मुख्यालय में सेकंड फ्लोर पर आयुक्त के साथ तीन अपर आयुक्त वीके चतुर्वेदी, मलिका निगम नागर और एमपीएस अरोरा के साथ उपायुक्त राहुल सिंह राजपूत के कैबिन हैं। निगमायुक्त जिस समय पहुंचीं, यहां बैठने वाला कोई भी वरिष्ठ अधिकारी अपनी सीट पर नहीं था। इन चारों अधिकारियों के अधीनस्थ 8-8 कर्मचारियों का स्टाफ हैं। जब यह अधिकारी अपने कक्ष में नहीं होते हैं उस समय स्टाफ के पास कोई काम नहीं होता है। दोपहर में लंच के बाद तो अमूमन रोजाना यही स्थिति रहती है। 

दोपहर तीन बजे से पांच बजे तक बैठना जरूरी
नगर निगम में अधिकारियों के दोपहर 3 बजे से 5 बजे तक नियमित रूप से बैठने की परंपरा है। इस संबंध में कई बार आदेश भी दिए जा चुके हैं। लेकिन लंबे समय से इसका पालन होता नहीं दिखाई दे रहा। निगमायुक्त एक बार फिर इस संबंध में आदेश जारी करने जा रहीं हैं

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