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Friday, March 31, 2017

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एमपी/अफसर मेडम बोलीं खबर मत छापना EVM के दो बटन दबाए तो प्रिंट हुआ कमल का फूल

ग्वालियर/ भिंड. प्रदेश में शुक्रवार को डमी
EVM और VVPAT(वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट
ट्रेल)पर सवाल उठ गए। अटेर असेंबली बाई इलेक्शन
की तैयारियों का जायजा लेने पहुंची चीफ
इलेक्शन ऑफिसर(सीईओ)सलीना सिंह ने जब डमी
EVM के दो अलग-अलग बटन दबाए तो VVPAT से
कमल के निशान का प्रिंट निकला। मशीनों की
जांच के दौरान पहले EVM का चौथे नंबर का बटन
दबाया गया। VVPAT से निकली पर्ची पर सत्यदेव
पचौरी का नाम और कमल का फूल छपा था। फिर
से कोई दूसरा बटन दबाया गया। इस पर भी कमल
का फूल छपा। हालांकि,तीसरी बार जब एक नंबर
का बटन दबाया तो पंजा निकला। अफसर ने
मीडिया को धमकाया-  खबर छापी तो थाने
भिजवा दूंगी...
-जब मीडियाकर्मियों ने इस गड़बड़ी पर अफसर
सलीना सिंह से सवाल उठाए तो उन्होंने हल्के
अंदाज में कहा,"खबर छापी तो थाने भिजवा
दूंगी।"
-इसके बाद लहार के एमएलए डॉ.गोविंद सिंह ने
प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आरोप लगाया,"बीजेपी EVM
में गड़बड़ी करके बाई इलेक्शन जीतना चाहती है।
उन्होंने कहा कि सलीना सिंह से ट्रांसपेरेंसी की
उम्मीद नहीं है।"
-सलीना ने मामले पर कहा,"एमपी में पहली बार
EVM के साथ VVPAT मशीन का इस्तेमाल किया
जा रहा है। लोग,वाेटिंग के बाद 7 सेकंड तक दिए
गए वोट को देख सकेंगे। यह इलेक्शन के लिए पूरी
तरह सेफ है। अटेर विधानसभा के वोटर हर
बार चेहरा बदलने में रखते हैं यकीन
- अटेर सीट पर यहां के वोटर्स ने 1952 से लेकर 2013
तक किसी भी शख्स को लगातार 2 बार जीतने
नहीं दिया। हरज्ञान बौहरे और सत्यदेव कटारे
जीते जरूर,लेकिन गेप देकर।
- इस बार सत्यदेव की जगह उनका बेटा हेमंत मैदान
में है। इसका नतीजा देखना काफी दिलचस्प
होगा।
-1952 में कांग्रेस के बाबूराम खेरी जीत दर्ज
कराकर पहले एमएलए बने थे,लेकिन दूसरी बार 1957
में वे हरज्ञान बौहरे से हार गए। इसके बाद खेरी ने
दोबारा कभी चुनाव नहीं लड़ा।
- इस सीट में बीजेपी का खाता जनसंघ के रूप में
1977 में तब खुला था,जब शिवशंकर समाधिया ने
बाजी मारी। इमरजेंसी के बाद हुए इस इलेक्शन में
कांग्रेस को बुरी तरह से हार झेलना पड़ी थी।
-1985 में कांग्रेस नेता कटारे अटेर की राजनीति में
धूमकेतु की तरह चमके,लेकिन उन्होंने 1990 में मैदान
छोड़ दिया।
-1993 में कटारे ने दोबारा इलेक्शन लड़ा और
बाजी मार ली। 1998 में हुए इलेक्शन में कटारे ने
फिर गेप ले लिया और लगातार दो बार एमएलए न
बनने से बच गए।
-हालांकि,2003 के इलेक्शन में जब प्रदेशभर में उमा
भारती की आंधी चली,लेकिन अटेर में कटारे
विजयी रहे।

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