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Saturday, March 11, 2017

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नई दिल्ली/ क्या अब अपनी पसंद का राष्ट्रपति बना सकेगी बीजेपी

नई दिल्ली. पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव
नतीजों के बाद अब राज्यसभा में सीटों
का गणित बदल जाएगा। अब तक
बीजेपी को अपर हाउस में नंबरों में
कमी के चलते कई बिल पास कराने में दिक्कतों का
सामना करना पड़ता था,लेकिन यू्पी और उत्तराखंड
में मेजॉरिटी में आने के बाद अगले एक साल में
राज्यसभा में उसके सांसदों की संख्या बढ़
जाएगी। इतना ही नहीं,वह
इसी साल जुलाई में राष्ट्रपति चुनाव में
अपनी पसंद के कैंडिटेट को जिताने की
स्थिति में भी आ गई है। इन नतीजों
का कहां कितना होगा असर...
1)राष्ट्रपति चुनाव पर कितना असर
-राष्ट्रपति को चुनने की प्रॉसेस में
लोकसभा,राज्यसभा के साथ-साथ राज्यों की
विधानसभाओं के मेंबर्स भी हिस्सा लेते हैं।
-5 राज्यों में से 2 में
(यूपी,उत्तराखंड)बीजेपी
को बहुमत हासिल हो गया है। इससे राष्ट्रपति चुनाव में उसके
कैंडिडेट की राह आसान हो गई है क्योंकि 403
विधानसभा सीटों वाले यूपी का राष्ट्रपति
चुनाव में बड़ा रोल होगा।
-हालांकि,उप राष्ट्रपति चुनावों पर इन नतीजों का कोई
असर नहीं होगा क्योंकि यह सिर्फ दोनों सदनों
(लोकसभा-राज्यसभा)के सांसदों के वोटों से तय होता है।
ये है राष्ट्रपति चुनाव का गणित
-10,98,882 राष्ट्रपति चुनाव में वोटों की वैल्यू है।
-5.49 लाख वोट चाहिए जीतने के लिए।
-4.57 लाख वोट हैं बीजेपी अलायंस
के पास। यानी 92 हजार और वोटों की
जरूरत है।
-1,03,756 इन पांच राज्यों के वोट की वैल्यू है।
इनमें से अकेले यूपी असेंबली के वोटों
की वैल्यू 83,824 है।
-02 राज्यों में बहुमत के बूते अब
बीजेपी को अपनी पसंद का
राष्ट्रपति मिल सकता है।
2)राज्यसभा में ऐसे मजबूत होगी
बीजेपी
-राज्यसभा से 2018 में रिटायर होने वाले 68 सांसदों में से 58
सांसद अप्रैल 2018 में ही रिटायर हो जाएंगे। इनमें
से 10 सांसद यूपी से हैं। एक सांसद उत्तराखंड से
है।
-चूंकि यूपी विधानसभा चुनाव में
बीजेपी को सबसे ज्यादा
सीटें मिली हैं,लिहाजा उसके पास
राज्यसभा में सांसदों की संख्या बढ़ाने का मौका है।
-बहरहाल,मौजूदा समय में राज्यसभा में एनडीए के
73 सांसद हैं। यूपीए के पाले में 71 सांसद हैं।
संख्या बल के हिसाब से यूपीए से
एनडीए आगे है मगर बहुमत के आंकड़े(123)से
एनडीए अभी भी बहुत
पीछे है।
-संख्या बल की कमी से
एनडीए को राज्यसभा से कई विधेयकों को पास कराने
में दिक्कतें आती हैं।
-यूपी चुनाव में बहुमत हासिल करने के बाद अपर
हाउस में उसके सांसदों की संख्या अब 10 और बढ़
जाएगी,जिससे उसे अब विधेयकों को पास कराने में
कम दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
मणिपुर-पंजाब के नतीजों का राज्यसभा पर
नहीं पड़ेगा असर
-मणिपुर और पंजाब के खाते से मई 2019 तक राज्यसभा
की कोई सीट खाली
नहीं होगी। चुनावी राज्यों में
सिर्फ गोवा ही अकेला राज्य है जहां इस साल एक
सीट खाली हो रही है।
-इसके अलावा राज्यसभा से अन्य 9 सांसद रिटायर
भी हो रहे हैं। इनमें गुजरात से 3 सांसद और
पश्चिम बंगाल से 6 सांसद हैं। लेकिन 10 जगहों के भरने के
बाद भी इस साल राज्यसभा की
तस्वीर में किसी तरह का खास बदलाव
नहीं होगा।
-इन चुनावी 5 राज्यों के अलावा
दिल्ली,केरल,मध्य
प्रदेश,आंध्रप्रदेश,कर्नाटक,बिहार,गुजरात और तेलंगाना से
भी राज्यसभा की सीटें
खाली हो रही हैं।
बीजेपी के राज्यों से
एनडीए को बेहतर नतीजे मिल सकते
हैं।
राज्यसभा के लिए नॉमिनेटेड सांसदों का रोल
-अप्रैल 2018 में 4 नॉमिनेटेड सांसदों का टेन्योर खत्म होने के
बाद केंद्र सरकार अपने मुताबिक राज्यसभा के लिए सांसदों का
चयन कर सकती है। सचिन तेंदुलकर और रेखा का
टेन्योर अप्रैल 2018 में खत्म होगा।
-बता दें कि सरकार की सलाह पर ही
नॉमिनेटेड सांसद अप्वांइट होते हैं। ये सांसद किसी
पार्टी के ह्विप से बंधे नहीं होते हैं।
हालांकि नॉर्मल तौर पर ये देखने में आता है कि जरूरत पड़ने पर
ये
सांसद सरकार के सपोर्ट में ही वोट करते हैं।
3)इस साल और कहां हैं चुनाव?
-2017 में जिन 2 और राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं,उनमें
हिमाचल प्रदेश और गुजरात शामिल हैं। गुजरात में पिछले 20
साल से बीजेपी की सरकार
है। 5 राज्यों के चुनावी नतीजों से एक
बार फिर मोदी लहर के संकेत मिले हैं। इसलिए
इसका फायदा गुजरात और हिमाचल में भी
बीजेपी को मिलेगा। हिमाचल में फिलहाल
अभी कांग्रेस की सरकार है।
4)2019 के लोकसभा चुनाव पर कितना असर?
-पांच राज्यों(यूपी,उत्तराखंड,पंजाब,मणिपुर,गोवा)के
चुनावी नतीजों से 2019 में होने वाले
लोकसभा चुनाव में राजनीति समीकरण
की दिशा भी तय होगी।
खासकर यूपी विधानसभा चुनाव नतीजों
का ज्यादा असर होगा,जहां बीजेपी
भारी बहुमत से सत्ता में पहुंची है।
403 विधानसभा सीटों वाले यूपी में
लोकसभा की 80 सीटें हैं। 2014 के
आम चुनाव में बीजेपी अलायंस को 73
सीटें हासिल हुई थीं। कहा
भी जाता है कि केंद्र का रास्ता यूपी से
होकर जाता है।

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