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Monday, December 26, 2016

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बेनामी संपत्ति वालों के खिलाफ एक्शन की तैयारी में मोदी सरकार

नई दिल्ली.नोटबंदी के बाद नरेंद्र मोदी सरकार अब बेनामी संपत्ति पर एक्शन लेने की तैयारी कर रही है। पीएम ने रविवार को ‘मन की बात’ प्रोग्राम में भी इस तरफ इशारा किया था। न्यूज एजेंसी ने एक सीनियर अफसर के हवाले से बताया- मोदी सरकार टैक्स कानून की उन खामियों को भी खंगाल रही है जिसका फायदा उठाकर बेनामी संपत्ति खरीदी जाती है। टैक्स रिर्टन्स के अलावा बैंक ट्रांजेक्शंस और छापों में मिले दस्तावेज चेक किए जा रहे हैं। इन तरीकों से रखी जा रही नजर...

1. टैक्स कानून की खामियां
- सरकार का मानना है कि देश के टैक्स कानून में कुछ ऐसी बड़ी खामियां हैं, जिनकी वजह से बेनामी संपत्ति और रियल एस्टेट में गलत तरीकों से इन्वेस्टमेंट किया जाता है।
2. आईटीआर फाइलिंग
- इस साल जुलाई तक हुए इनकम टैक्स रिटर्न की फाइलिंग को चेक किया जा रहा है। संदिग्ध लोगों या कंपनियों को सबसे पहले चेक किया जा रहा है।
3. बरामद दस्तावेज
- नोटबंदी के बाद इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने बाकी एजेंसियों के साथ कोऑर्डिनेट कर देश के कई हिस्सों में छापे मारे। इनमें कई कैश और गोल्ड के अलावा अहम दस्तावेज भी मिले। अब इन्हीं दस्तावेजों को बारीकी से चेक किया जा रहा है।
4. बैंक ट्रांजेक्शंस
- आईटी डिपार्टमेंट और बाकी एजेंसियां देशभर में कुछ खास अकाउंट्स पर नजर रख रही हैं। इन अकाउंट्स को ऑपरेट करने वालों पर शक है कि उन्होंने बेनामी संपत्तियां खरीदीं या रियल एस्टेट सेक्टर में गैरकानूनी तरीकों से इन्वेस्टमेंट किया।
लेकिन दिक्कत ये
- भारत में लैंड रिकॉर्ड्स बहुत साफ-सुथरे और सिस्टमैटिक नहीं हैं। लिहाजा, इनकी बारीकी से जांच में परेशानियां आएंगी।
किन लोगों पर शक ज्यादा?
- माना जाता है कि नेताओं, कारोबारियों और एनआरआई लोगों ने रिश्तेदारों या करीबियों के नाम से प्रॉपर्टीज में इन्वेस्ट किया है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, देश के करीब-करीब हर शहर में पांच से दस फीसदी बेनामी संपत्तियां हैं।
कानून की बात
- नवंबर में सरकार ने बेनामी प्रॉपर्टी ट्रांजेक्शन एक्ट लागू किया था। इस कानून के मुताबिक, अगर किसी शख्स ने किसी दूसरे के नाम से प्राॅपर्टी खरीदी तो उसको सात साल की सजा हो सकती है। इसके अलावा वो प्रॉपर्टी भी जब्त की जा सकती है।
मोदी ने कहा था- अगला टारगेट बेनामी संपत्तियां
- मोदी ने रविवार को मन की बात में करप्शन और नोटबंदी की चर्चा करते हुए कहा था, ''मैं विश्वास दिलाता हूं कि ये पूर्णविराम नहीं है। रुकने या थकने का सवाल ही नहीं उठता। आपको मालूम होगा कि बेनामी संपत्ति का कानून 1988 में बना था। लेकिन कभी भी उसके नियम नहीं बने, उसे नोटिफाई नहीं किया है। हमने उसे निकालकर धारदार बनाया है। आने वाले दिनों में वह काम करेगा।''
क्या होती है बेनामी संपत्ति? कैसे बनाते हैं?
- बेनामी संपत्ति का मतलब ऐसी प्रॉपर्टी, जिसका ओनर कागजों में कोई और है, जबकि उसके लिए पेमेंट किसी और ने किया है।
- काली कमाई करने वाले लोग बेटा-बेटी, पति-पत्नी के लिए ऐसी प्रॉपर्टी खरीदते हैं, लेकिन इनकम टैक्स से जुड़े डिक्लेरेशन में उसका जिक्र नहीं करते।
- कई लोग नौकर-चाकर, पड़ोसी, दोस्तों और रिश्तेदारों के नाम पर प्लाॅट्स, खेती की जमीन, फ्लैट्स खरीद लेते हैं।
- दरअसल, दूसरे के नाम पर रजिस्ट्री करवाकर उस प्राॅपर्टी की वसीयत बनवा ली जाती है। इसमें वही शख्स वारिस बन जाता है, जिसने काली कमाई से वह प्रॉपर्टी खरीदी होती है।
- वसीयत के साथ बेनामी मालिक से एक पावर ऑफ़ अटाॅर्नी करवाई जाती थी। इस तरह वह उस प्राॅपर्टी को बेचने के हक दूसरे को दे देता है।
- बेनामी मालिक से उस प्राॅपर्टी की सेलडीड भी बनवाई जाती थी। इसमें वह उस प्राॅपर्टी का पूरा पेमेंट लेकर असली मालिक या उसके भरोसेमंद शख्स को बेचने का करार कर लेता है।
- इस तरह ब्लैकमनी रखने वाला शख्स बिना अपना नाम उजागर किए अपना पैसे इन्वेस्ट कर देता है और प्रॉपर्टी पर कब्जा कर उसके पूरे अधिकार अपने पास रख लेता है।

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